तेरे रंग में रंगूगी मेरे सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे,

मैं तेरी थी रहूंगी मेरे साँवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम सूरज बनों तो बनूँ रौशनी,

तुम सूरज बनों मैं बनूँ रौशनी,

तेरी ज्योति में आके मिलूँ सांवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम चंदा बनो तो चकोरी बनूँ,

तुम चंदा बनो तो चकोरी बनूँ,

तेरी यादों में तड़पूँ मेरे सावरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम मोर बनों तो बनूँ पंखड़ी,

तुम मोर बनों तो बनूँ पंखड़ी,

तेरे मुकुट में आके सजूं सांवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम चन्दन बनों तो मैं खुशबू बनूं,

तुम चन्दन बनों तो मैं खुशबू बनूं,

तेरे माथे पे आके सजूं सांवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम कन्हैया बनों तो बनूं बाँसुरी,

तुम कन्हैया बनों तो बनूं बाँसुरी,

जब रास रचाओ बजूं सांवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे॥

तुम भगवन बनों तो मैं दासी बनूँ,

तुम भगवन बनों तो मैं दासी बनूँ,

तेरे चरणों की सेवा करूँ सांवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे,

मैं तेरी थी रहूंगी मेरे साँवरे,

तेरे रंग में रंगूँगी मेरे सांवरे...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।