माटी की मटकी राम राम बोल

संत कबीर
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

माटी की मटकी राम राम बोल,

राम राम बोल हरी हरी बोल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

गर्भवास में उलटा लटकया,

गर्भवास में उलटा लटकया,

बाहर आयो तु कर कर कौल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

ऊपर से तु चिकनी चुपडी,

ऊपर से तु चिकनी चुपडी,

भीतर से साँची साँची बोल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

बाहर जगत में आकर नाम ना लिना,

बाहर जगत में आकर नाम ना लिना,

आगे करे ना कोई कौल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

कहत कबीरा सुनो भाई साधो,

कहत कबीरा सुनो भाई साधो,

अब तो मुख शब्द बोल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

माटी की मटकी राम राम बोल,

राम राम बोल हरी हरी बोल,

माटी री मटकी राम राम बोल।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।