सांवलिये तेरा मुझको दीदार हो जाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवलिये तेरा मुझको,

दीदार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।।

कैसे चलेगी मोहन,

तूफान में नैया,

तूफान में नैया,

हो जाए एक इशारा,

भव पार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।

सांवलिये तेरा मुझकों,

दीदार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।।

ख्वाहिश मेरे जीवन की,

ज्यादा बडी नही,

ज्यादा बडी नही,

बस तेरी किरपा मुझपे,

इक बार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।

सांवलिये तेरा मुझकों,

दीदार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।।

खाली नही जाऊंगा,

जिद पे अड़ा हूँ श्याम,

जिद पे अड़ा हूँ श्याम,

देखूं दयालु कैसे,

इंकार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।

सांवलिये तेरा मुझकों,

दीदार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।।

कर दे मुरादे पूरी,

बस इतना सोच कर,

बस इतना सोच कर,

‘बनवारी’ मुझे भी तेरा,

ऐतबार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।

सांवलिये तेरा मुझकों,

दीदार हो जाए,

उजड़ा चमन फिर से,

मेरा गुलजार हो जाए।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।