जब तक अम्बर में चंदा नूरानी रहे

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॥ पावन पाठ ॥

मैया करवा चौथ मैया

मैया करवा चौथ मैया।।

जब तक अम्बर में.. चंदा नूरानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे,

मैया करवा चौथ मैया,

मैया करवा चौथ मैया।।

ओ जब तक अम्बर में.. चंदा नूरानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे,

मैया करवा चौथ मैया,

मैया करवा चौथ मैया।।

मेरे जीवन के ओ रे खेवैीया,

तेरे हाथो में है मेरी नैया,

दुनिया कुछ भी कहे भले कहती रहे,

मेरी पूजा तेरी ही दीवानी रहे,

मैया करवा चौथ मैया

मैया करवा चौथ मैया।।

ओ जब तक अम्बर में चंदा नूरानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे।।

अगनी के फेरे लगा कर,

याद बीते दीनो की दिला कर,

आई मैं तेरे द्वार,

लिए मान का संसार,

मेरे होठों पे तेरी कहानी रहे,

मैया करवा चौथ मैया

मैया करवा चौथ मैया।।

ओ जब तक अम्बर में चंदा नूरानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे,

ज़िंदगानी रहे ज़िंदगानी रहे।।

छुपे नारी के मन में वो सीता,

जिसका जीवन अंगरो पे बीता,

मेरे जीवन के राम तेरा रटती है नाम,

मेरे माथे पे तेरी निशानी रहे,

मैया करवा चौथ मैया

मैया करवा चौथ मैया।।

ओ जब तक अम्बर में चंदा नूरानी रहे,

मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे,

ज़िंदगानी रहे ज़िंदगानी रहे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।