चिट्ठी प्रेम वाली पाके

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चिट्ठी प्रेम वाली पाके, मोहना याद करनी हा,

जे ना मिलया शाम प्यारा, रोरो आहा भरनी हा॥

कृष्ण लीता सी अवतार, खुल गए मथुरा दे दरबार,

सुत्ते रह गये पहरेदार, मै बलिहार जानी हा.....-2

चिट्ठी प्रेम वाली पाके......

कृष्ण टोकरे च पाया, यमुना जल उछल के आया,

कृष्ण चरण छुआया, मै बलिहार जानी हा.....-2

चिट्ठी प्रेम वाली पाके......

कृष्ण देवकी दा जाया, मात यशोदा गोदी पाया,

मक्खन मिश्री नाल रजाया, मै बलिहार जानी हा.....-2

चिट्ठी प्रेम वाली पाके, मोहना याद करनी हा,

जे ना मिलया शाम प्यारा, रोरो आहा भरनी हा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।