भोले तेरी ना मैं गोटु भंगियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुन भोले तेरी ना मैं गोटु भंगियाँ.....-3

भंगियाँ की आदत तेरी जाती नहीं,

कोई मिठाई तुझे भाती नहीं,

गोटु भंगियाँ ना गोटु भंगियाँ,

सुन भोले तेरी ना मैं गोटु भंगियाँ.......

भंगियाँ गोट के मैं तो मरी,

भंगियाँ ने हालात खराब करी,

गोटु भंगियाँ ना गोटु भंगियाँ,

सुन भोले तेरी ना मैं गोटु भंगियाँ.......

गोट के भांग मैं तो हारी पड़ी,

सुन ले भोले मैं पीहर चली,

गोटु भंगियाँ ना गोटु भंगियाँ,

सुन भोले तेरी ना मैं गोटु भंगियाँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।