जिस घर मे हरि गुणगान

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - एक प्यार का नगमा है

जिस घर में हरि गुणगान, वो घर है स्वर्ग समान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान॥

ये मानव का चोला हर बार नही मिलता,

उगता है सूरज जो, वो सांझ पड़े ढलता,

जीवन का भरोसा क्या, दोबारा मिले ना मिले,

बड़े भाग्य से मौका मिला, चलो गो सेवा करले,

गो सेवा में मन को लगा, हो जीवन का कल्याण,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान,

जिस घर में हरि गुणगान, वो घर है स्वर्ग समान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान।

गो माता के रग रग में, है देवो का स्थान,

गो हत्या है ब्रह्म हत्या, ये कहते है वेद पुराण,

फिर जान बूझकर के, क्यो गलती करे इंसान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान,

जिस घर में हरि गुणगान, वो घर है स्वर्ग समान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान।

गर मुक्ति चाहते हो, करो निशदिन गो सेवा,

"दिलबर" ये निश्चित है, मिले मुक्ति का मेवा,

राजर्षि जयपाल सिंह कहे, गो सेवा है जग मे महान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान,

जिस घर में हरि गुणगान, वो घर है स्वर्ग समान,

आँगन तुलसी, गो सेवा, यही मानव की पहचान............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।