जगत के रंग क्या देखूं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,

क्यों भटकूँ गैरों के दर पे, के शिव का द्वार काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,

तेरा दीदार काफी है..

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है।

नज़ारे और दुनिया के, मेरी आँखों को ना भाये,

नज़ारे और दुनिया के, मेरी आँखों को ना भाये,

मेरी आँखों को ना भाये...

तेरी मूरत, तेरा दर्शन, तेरा श्रृंगार काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत के साज बाजों से, हुए हैं कान अब बहरे,

जगत के साज बाजों से, हुए हैं कान अब बहरे,

हुए हैं कान अब बहरे..

कहाँ जाके सुनूँ सुमिरन, मधुर शिव नाम काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का,

जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का,

बिछाया जाल माया का..

तेरे भक्तों से हो प्रीति, के शिव परिवार काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत की झूठी रौनक से, हैं आँखें भर गयी मेरी,

जगत की झूठी रौनक से, हैं आँखें भर गयी मेरी,

हैं आँखें भर गयी मेरी...

चले आओ मेरे भोले, दर्श की प्यास काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।