मैं भूल ना पाउँगा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं भूल ना पाउँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं सब को सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं भूल ना पाउँगा, तेरे दर की यादें ll

कैसे कैसे तुम महाँरानी, "अपने दर पे बुलाती हो" ll

ऊँचे पहाड़ों के नज़ारे, हम सब को दिखलाती हो" ll

घर घर में सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं सब को सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं भूल ना पाउँगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

भक्त प्यारे दर पे तुम्हारे, "जयकारे माँ लगाते हैं" ll

रल मिल के तेरी भेंटे मईया, "सुनते और सुनाते हैं" ll

इस दिल में वसाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं सब को सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं भूल ना पाउँगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

गुफ़ा में बैठी तुम महाँरानी, "सबकी झोली भरती हो" ll

सब बच्चों के सर पर मईया, "हाथ मेहर का धरती हो" ll

सब को बतलाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं सब को सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं भूल ना पाउँगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपने घर में पहुँच के मईया, "कंज़कें तेरी बिठाता हूँ" ll

हलवे चने का भोग लगाकर, "दर्शन तेरा पाता हूँ" ll

सबको बतलाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

*मैं सब को सुनाऊँगा, तेरे दर की यादें ll

मैं भूल ना पाउँगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।