नयन से नयन से

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

नयन से नयन से,

नयन से नयन से,

दरस कर ले, मन के नयन से,

विनायक रिझेंगे पल में, भजन से।

तन की आँखों पे है, कैसा पर्दा गिरा,

माया का जग में कही, दिखता है ना सिरा,

तन की आँखों पे है, कैसा पर्दा गिरा,

माया का जग में कही, दिखता है ना सिरा,

गणराया की शरण सच्चा है आसरा,

नयन से नयन से,

नयन से नयन से,

दरस कर ले मन के नयन से,

विनायक रिझेंगे पल में भजन से।

गणपती नाम से, अपनी भक्ति जगा,

उनके चिंतन में तू, जीवन शक्ति लगा,

गणपती नाम से, अपनी भक्ति जगा,

उनके चिंतन में तू, जीवन शक्ति लगा,

गणपती साथ है झुटे भय को भगा,

नयन से नयन से,

नयन से नयन से,

दरस कर ले मन के नयन से,

नयन से नयन से,

दरस कर ले मन के नयन से,

विनायक रिझेंगे पल में भजन से,

विनायक रिझेंगे पल में भजन से।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।