सिर पे सजाके मोतियों का ताज

नरेन्द्र चंचल
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सिर पे सजा के मोतियों का ताज,

रखने को अपने भक्तों की लाज,

ये गौरी के ललना आये गजराज,

गौरी के ललना आये गजराज,

सिर पे सजाके मोतियों का ताज,

रखने को अपने भक्तों की लाज,

ये गौरी के ललना आये गजराज।

श्रद्धा से झोलिया अपनी पसारो,

श्रद्धा से झोलिया अपनी पसारो,

सिद्धिविनायक को मन से पुकारो,

सिद्धिविनायक को मन से पुकारो,

माँगना जो तुमने माँग लेना आज,

माँगना जो तुमने माँग लेना आज,

ये गौरी के ललना आये गजराज,

सिर पे सजाके मोतियों का ताज।

दया की दृष्टि ये जिनपे करेंगे,

दया की दृष्टि ये जिनपे करेंगे,

दुखरो भी उनके तो पल में हरेंगे,

दुखरो को उनके तो पल में हरेंगे,

भक्तो की चिंता का होगा इलाज,

भक्तो की चिंता का होगा इलाज,

ये गौरी के ललना आये गजराज,

सिर पे सजाके मोतियों का ताज।

ये है महोदर वे गणराज दाता,

ये है महोदर वे गणराज दाता,

करुणा का सागर ये भाग्यविधाता,

करुणा का सागर ये भाग्यविधाता,

जिसे भाये निर्दोष भक्ति का साज,

जिसे भाये निर्दोष भक्ति का साज,

ये गौरी के ललना आये गजराज,

सिर पे सजाके मोतियों का ताज

ये गौरी के ललना आये गजराज,

रखने को अपने भक्तो की लाज,

ये गौरी के ललना आये गजराज..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।