कण कण में बास है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कण कण में बास हे जिसका ,तिहु लोक में राज हे उसका,

हारे का साथ निभाए ,प्रेमी को गले लगाए,

ऐसा तो हमारा बाबा हे, बाबा तो हमारा है,

कण कण में बास .......

श्याम प्रभु को कोई अपना बनाकर देखे,

कितना प्यार लुटाता, प्रेम बढाकर देखे,

मितो का मीत कन्हया, भगतो का मान बढ़ेया,

ऐसा तो हमारा बाबा है ,बाबा तो हमारा है,

कण कण में बास.....

श्याम प्रभु से कोई छुपे ना हाल हमारे,

कदम कदम पर देते बाबा सबको सहारे,

जब याद करू आजावे, कस्टो को दूर भगाये,

.ऐसा तो हमारा बाबा है ,बाबा तो हमारा है,

कण कण में बास....

जीवन पथ के कांटे बाबा दूर हटाए,

अपने भगत की खातिर क्या क्या खेल रचाये,

दिलदार कन्हैया प्यारा ,ये सबसे न्यारा न्यारा

ऐसा तो हमारा बाबा है ,बाबा तो हमारा है,

कण कण में बास..

नंदू अपनी बीती सबको आज बताऊ,

श्याम प्रभु के दम पर में तो बढ़ता जाऊ,

बिगड़ी मेरी श्याम सुधारे,इनसे ही वारे न्यारे,

ऐसा तो हमारा बाबा है ,बाबा तो हमारा है,

कण कण में बास..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।