शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी,

तुम कैलाशी हो, घट घट वासी हो॥

देवो के महादेव कहाते,

दुखियों के साथी हो, घट घट वासी हो,

शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी,

तुम कैलाशी हो, घट घट वासी हो॥

तीनो लोको में डंका बाजे,

भोले तुम अविनाशी हो, घट घट वासी हो,

शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी,

तुम कैलाशी हो, घट घट वासी हो॥

शिव वरदानी औघड दानी,

बसते काशी हो, घट घट वासी हो,

शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी,

तुम कैलाशी हो, घट घट वासी हो॥

शिव के नाम का सुमिरन प्यारा,

दूर उदासी हो, घट घट वासी हो,

शिव त्रिपुरारी भोले भंडारी,

तुम कैलाशी हो, घट घट वासी हो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।