मैं बंजारन दीवानी मैं हो गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं बंजारन दीवानी मैं हो गई,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

सावन की रिम झीम,

बरखा बदरिया,

भीग गयो सब अंग अंग मेरो,

भीग गयो सब अंग अंग मेरो,

मै बंजारन दीवानी मैं हो गई,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग।।

डमरू तेरा मुझको नचाये,

क्या करूँ कुछ भी होश ना आये,

मस्ती में तेरी नाच रही हूँ,

मस्ती में तेरी नाच रही हूँ,

सारी दुनिया हो गई दंग दंग,

भोला पि गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग।।

जीवन नैया तेरे हवाले,

जितना चाहे उतना नचाले,

पगली दीवानी सब कहने लगे,

पगली दीवानी सब कहने लगे,

मोपे चढ़ गया तेरे रंग रंग,

भोला पि गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग।।

अच्छा बुरा क्या होश नहीं है,

तेरा भी इसमें दोष नहीं है,

‘लहरी’ ना जानू बाबा कुछ भी ना जानू,

‘लहरी’ ना जानू बाबा कुछ भी ना जानू,

तोए पूजन को का ढंग ढंग,

भोला पि गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग भंग मैं,

पी गई थोड़ी भंग.............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।