मैया को कैसे मैं मनाऊँ रे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैया को कैसे मैं मनाऊँ रे,

मेरी मैया ना माने,

अम्बे ना माने जगदम्बे ना माने,

काली ना माने महाकाली ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊ रे,

मेरी मैया ना माने।।

मैया को भाए ना रेशम की साड़ी,

मैया को भाए ना रेशम की साड़ी,

चुनरिया कहाँ से मैं लाऊँ रे,

मेरी मैया ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊ रे,

मेरी मैया ना माने।।

मैया को भाए ना ढोलक मंजीरा,

मैया को भाए ना ढोलक मंजीरा,

ढोल नगाड़े कहाँ से लाऊँ रे,

मेरी मैया ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊ रे,

मेरी मैया ना माने।।

मैया को भाए ना मेवा मिठाई,

मैया को भाए ना मेवा मिठाई,

चना, हलवा पूड़ी कहाँ से मँगवाऊं रे,

मेरी मैया ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊ रे,

मेरी मैया ना माने।।

मैया को भाए ना बग्गी और घोड़ा,

मैया को भाए ना बग्गी और घोड़ा,

शेर कहाँ से मँगवाऊं रे,

मेरी मैया ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊँ रे,

मेरी मैया ना माने,

अम्बे ना माने जगदम्बे ना माने,

काली ना माने महाकाली ना माने,

मैया को कैसे मैं मनाऊ रे,

मेरी मैया ना माने............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।