कान्हा नही माने रे नही माने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – भोला नहीं माने रे

कान्हा नहीं माने रे नहीं माने,

मचल रहे चंदा को,

समझा रही है मात यशोदा,

समझा रही है मात यशोदा,

नन्द बाबा लगे है समझाने,

मचल रहे चंदा को,

कान्हा नही माने रे नही माने,

मचल रहे चंदा को।।

कहे मैया से रो रो के,

चंदा मामा ही मै लूँगा,

ले लो सारे खिलोने मेरे,

मै तो चंदा से खेलूँगा,

वो तो अपनी ही जिद है ठाने रे,

मचल रहे चंदा को,

कान्हा नही माने रे नही माने,

मचल रहे चंदा को।।

मैया बोली कन्हैया से,

लाला माखन जरा खा ले,

मैया झटकी कन्हैया ने,

माखन मटकी गिरा डाली,

सारी दुनिया बाल हट जाने रे,

मचल रहे चंदा को,

कान्हा नही माने रे नही माने,

मचल रहे चंदा को।।

लेके पानी भरी थाली,

देखो माता यशोदा आई,

अरे मान गये कान्हा,

देख चंदा की परछाई,

‘शिवरंजनी’ लगी है मुस्काने,

मचल रहे चंदा को,

कान्हा नहीं माने रे नहीं माने,

मचल रहे चंदा को,

समझा रही है मात यशोदा,

समझा रही है मात यशोदा,

नन्द बाबा लगे है समझाने,

मचल रहे चंदा को,

कान्हा नही माने रे नही माने,

मचल रहे चंदा को............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।