तुमसा और ना कोई

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी तुलना किससे करूँ माँ,

तेरी तुलना किससे करूं माँ,

तुमसा और ना कोई,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

मुझसे पहले तू रोई,

तेरी तुलना किससे करूं माँ,

तुमसा और ना कोई।।

मेरे हँसने पर हँसती है,

रोने पर रोती है,

फिर भी मैं ये समझ ना पाया,

माँ कैसी होती है,

मैं खोया इस जग के सुख में,

माँ मेरे ख्याल में खोई,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

मुझसे पहले माँ रोई,

तेरी तुलना किससे करूं माँ,

तुमसा और ना कोई।।

मिल जाएगा दुनिया का सुख,

सपनो में जो प्यारा,

पा लूँगा मैं सबकुछ यहाँ पर,

माँ ना मिलेगी दोबारा,

आँखों के हर इक आंसू से,

साँसे माँ ने संजोई,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

मुझसे पहले माँ रोई,

तेरी तुलना किससे करूं माँ,

तुमसा और ना कोई।।

जैसे अँधेरे में रहकर,

करता दीप उजाला,

ऐसे बेधड़क तुझको माँ की

ममता ने है पाला,

जबतक सोया मैं ना चैन से,

तबतक माँ नहीं सोई,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

जब जब टुटा मेरा खिलौना,

मुझसे पहले माँ रोई,

तेरी तुलना किससे करूं माँ,

तुमसा और ना कोई..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।