नी मैं वेखां गलियां दे मोड़

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नी मैं वेखां गलियां दे मोड़,

अज मेरे श्याम औणगे,

हारांवाले औणगे.......

अपने शाम लई मैं पलका विछावांगी,

पलका दे नाल रस्ता साफ़ बनावांगी,

किते चुभ्भन ना पैरां विच रोड़,

अज मेरे श्याम औणगे.......

अपने शाम लई मैं जल लयावांगी,

जल दे नाल ओदे चरण सजावांगी,

नाले पींवां चरणां दा घोल,

अज मेरे श्याम औणगे..........

अपने शाम लई मैं फुल्ल लयावांगी,

फुल्लां दे नाल सोहणा आसन बनावांगी,

नाले बैठा चरणां दे कोल,

अज मेरे श्याम औणगे.........

अपने शाम लई मैं बेर लयावांगी,

मिठे-मिठे बेरां दा भोग लगावांगी,

अज लगेगा बेरां दा भोग

अज मेरे श्याम औणगे..........

अपने शाम लई मैं सत्संग करावांगी,

सत्संग करावांगी ते संगत बुलावांगी,

नाले सुनांगी मिठे-मिठे बोल,

अज मेरे श्याम औणगे,

नी मैं वेखां गलियां दे मोड़,

अज मेरे श्याम औणगे,

हारांवाले औणगे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।