पहिले पहीले छठि मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पहिले पहीले छठि मैया, अयलौं तोहर दुआर,

देबै सनतान छठि मैया, बढ़य कुल परिवार॥

छठि तोर मान मनायब, अनलौं लाले अड़हुल,

सुरूज के अपने चढ़ायब, लोढ़लौं भोरे भोरे फूल॥

हरू हरू दुःख हे दिवाकर, भेलै अरघ के बेर,

शीत मासे जल मे कंपै छी, करियौ आब नै अबेर॥

साँच फल सूपमे सजेलियै, आऊ देखू छठि माय,

ऊगू रवि कत चलि गेलियै, देथिन अरघ हे दाय॥

सुनू छठि भजन गबै छी, करियौ जनम सनाथ,

अनधन लछमी मँगै छी, रखियौ हाथ मोर माँथ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।