आनंद ही आनंद है माता

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आनंद ही आनंद है, आनंद ही आनंद है ll

तेरी चौंकी में छाया, 'आनंद ही आनंद'

हर कोई लेने आया, 'आनंद ही आनंद'

आनंद ही आनंद है, आनंद ही आनंद l

आनंद ही आनंद है, आनंद ही आनंद है ll

शेराँवाली माँ, तेरी सदा ही जय,

लाटां वाली माँ, तेरी सदा ही जय ll

जो भी चौंकी में आया, निहाल हो गया l

तेरी ज्योति का जलवा, कमल हो गया ll

तेरे भक्तों ने पाया, आनंद ही आनंद l

आनंद ही आनंद है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

आज कोई न ख़ाली, यहाँ से जाएगा l

जिसके मन में जो आया, वही वो पाएगा ll

रग रग में समाया, आनंद ही आनंद l

आनंद ही आनंद है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

दर पे मांगने, वालों के हैं, मेले लग गए l

चँचल के संग, आज सब के, भाग जग गए ll

महाँमाया की है माया, आनंद ही आनंद l

आनंद ही आनंद है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।