हे मात मेरी अब दे दो दर्शन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

इस जग ने मुझसे नज़रे है फेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी॥

अब तो तुम्ही हो मेरा सहारा,

डूब रहा हूँ दे दो किनारा,

मैया मेरा हाथ पकड़ लो,

बेटा हूँ मैं भी तो तुम्हारा,

विनती है माँ तुमसे ये मेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी.........

झूठी दुनिया है मोह माया,

बेटा तुम्हरी शरण में आया,

मुझको भी माँ पार लगाओ

रोके रुके ना अक्षु धारा,

दूर करो दिन राते अँधेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी.........

माँ तुमको ही सोंपा जीवन,

चरणों तुम्हारे सब कुछ अर्पण,

तुम हो सहारा तुम हो किनारा,

लीला तुम्हारी अपरम्पारा,

तुम ही माँ जीवन दुनिया हो मेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी.........

जिसने जो माँगा वो मिला है,

मैया बेटे से क्या गिला है,

मैं तो बेटा हूँ माँ तुम्हारा,

दुनिया से मिला कैसा सिला है,

मुझको ही सारी विपदा है घेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

इस जग ने मुझसे नज़रे है फेरी,

अब दे दो दर्शन करना ना देरी,

हे मात मेरी... अब दे दो दर्शन करना ना देरी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।