कभी सुख है कभी दुःख है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

कभी सुख है, कभी दुःख है, वक़्त का ये तराना है,

शक्ति देना हमें बाबा, ग़मों में मुस्कुराना है॥

सफ़र ये है बड़ा मुश्किल, साई आसान कर देना,

पाँव कांटे चुबे जब जब, साईं मुस्कान भर देना......-2

ना हारूँ हार कर खुद में, सफर आगे बढ़ाना है,

नेकियों के मुबारक रस्तों पे चलते जाना है,

कभी सुख है, कभी दुःख है, वक़्त का ये तराना है,

शक्ति देना हमें बाबा, ग़मों में मुस्कुराना है॥

कभी ना रूठना हमसे, आबरुं आ बचा लेना,

आप को भूल से भूलें, तो भी बाबा निभा लेना......-2

बदी से दूर हो कर आपको, दिल में बसाना है,

शिरडी के रस्ते चल कर साई के, द्वारे जाना है,

कभी सुख है, कभी दुःख है, वक़्त का ये तराना है,

शक्ति देना हमें बाबा, ग़मों में मुस्कुराना है॥

नाथ जब साथ तुम होंगे, छल कपट दूर सब होंगे,

चाँद तारों से जीवन में, हज़ारो नूर सब होंगे......-2

सूखा कर मौज नफ़रत की, प्यार साई का पाना है,

अँधेरे आपकी भक्ति से, जीवन के मिटाना है,

कभी सुख है, कभी दुःख है, वक़्त का ये तराना है,

शक्ति देना हमें बाबा, ग़मों में मुस्कुराना है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।