कैसे दिन ये तूने भेजे सुनहरे

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॥ पावन पाठ ॥

कैसे दिन ये तूने,

कैसे दिन ये तूने, भेजे सुनहरे,

कैसे दिन ये तूने, भेजे सुनहरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

कैसे दिन ये तूने, भेजे सुनहरे,

साई भूले कैसे एहसान तेरे,

साई भूले कैसे एहसान तेरे,

साई भूले कैसे एहसान तेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे।

दे दिया सब ही जीवन में मनचाहा,

दे दिया सब ही जीवन में मनचाहा,

झोली भर कर तन मन धन के सुख सारे,

हमको तू ही धरता है,

हारे को जीत दिलाता है साई,

हारे को जीत दिलाता है साई,

तू ही ख्वाबों को पूरे करता है साई,

ख्वाबों को पूरे करता है,

कैसे बखाने साई की महिमा,

यहाँ हर कोई माला तेरे ही नाम की फेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

कैसे दिन ये तूने, भेजे सुनहरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे।

शिरडी तीर्थ धाम है,

साई सुन्दर नाम है,

मन कहता है ना जिदाई झूमे,

मन कहता है ना जिदाई झूमे,

यही साई चिंतन करते करते,

साई सुमिरन करते करते,

इस माटी से टीका अपने सर पे,

है करते वो ही पार उतरते,

जग से वो ही पार उतरते,

तम हर लेता है साई दिवाकर,

ओ खिल उठते है सवेरे,

है बिखरे बादल घनेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे,

साई मेरे साई मेरे साई बाबा मेरे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।