दर पे है आये दाता

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॥ पावन पाठ ॥

दर पे है आये दाता झोली पसारी है,

दर पे है आये दाता झोली पसारी है,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

दर पे है आये दाता झोली पसारी है,

दर पे है आएं दाता झोली पसारी है।

चरणों में तेरे सारी जीवन की खुशिया है,

जो भी तेरी शरण में आये पार उसकी नैया है,

चरणों में तेरे सारी जीवन की खुशिया है,

जो भी तेरी शरण में आये पार उसकी नैय्या है,

हम भी है दर पे तेरे आस ये लगाये है,

हम भी है दर पे तेरे आस ये लगाये है,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

दर पे है आये दाता झोली पसारी हैं,

दर पे है आएं दाता झोली पसारी है।

मुझे हर कदम पे दाता तेरा ही सहारा है,

दुनिया की हर मुश्किल में तुम्ही ने संभाला है,

मुझे हर कदम पे दाता तेरा ही सहारा है,

दुनिया की हर मुश्किल में तुम्ही ने संभाला है,

तेरी ही आस दिल में लेकर के आये है,

तेरी ही आस दिल में लेकर के आये है,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

दर पे है आये दाता झोली पसारी हैं,

दर पे है आएं दाता झोली पसारी है।

निसदिन हो दर्शन तेरा यही आस मेरी है,

करता रहू तेरी सेवा यही माँग मेरी है,

निसदिन हो दर्शन तेरा यही आस मेरी है,

करता रहू तेरी सेवा यही माँग मेरी है,

कर दो मुरादे पूरी दामन फैलाये है,

कर दो मुरादे पूरी दामन फैलाये है,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

रहमत से झोली भर दे खाली ना जायेंगे,

दर पे है आये दाता झोली पसारी हैं,

दर पे है आएं दाता झौली पसारी है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।