लगी मन में लगन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

लगी मन में लगन साई पावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

पावन की गुणगावन की,

पावन की गुणगावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

भावत नाही बिन कछु तेरे,

भावत नाही बिन कछु तेरे,

भावत नाही बिन कछु तेरे,

भावत नाही बिन कछु तेरे,

राह तकु मैं तेरे आवन की,

राह तकु मैं तेरे आवन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की।

सुन साई बाबा मन यही चाहे,

सुन साई बाबा मन यही चाहे,

सुन साई बाबा मन यही चाहे,

सुन साई बाबा मन यही चाहे,

धूल बनू मैं तेरे आँगन की,

धूल बनू मैं तेरे आँगन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की।

जाऊ कहाँ मैं तज दर तेरो,

जाऊ कहाँ मैं तज दर तेरो,

जाऊ कहाँ मैं तज दर तेरो,

जाऊ कहाँ मैं तज दर तेरो,

मर्ज़ी नहीं तेहजावन की,

मर्ज़ी नहीं तेहजावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की।

जीवन है साई तेरे भरोसे,

जीवन है साई तेरे भरोसे,

जीवन है साई तेरे भरोसे,

तेरे भरोसे तेरे भरोसे,

तेरे भरोसे तेरे भरोसे,

आस है केवल तेरे दर्शन की,

आस है केवल तेरे दर्शन की,

लगी मन में लगन साई पावन की,

लगी मन में लगन साई पावन की।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।