जब तक जियु मैं सुहागन जियु

अनुराधा पौडवाल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देदो अपनी पुजारन को वरदान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

मुझसे हो ना जुदा मेरा भगवान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

देदो अपनी पुजारन को वरदान माँ......

मांग सिंधुर से भरी ही रहे,

मैं दिन रात तुमसे येही मांगती,

साया सिर पे रहे सरताज का,

और इसके सिवा कुछ नहीं मांगती,

इस दिल में है बस यही अरमान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

देदो अपनी पुजारन को वरदान माँ.......

कोई मंदिर सजे ना बिना मूर्ति,

बिन खेवइयाँ के नइयाँ है किस काम की,

इस बगियाँ का माली सलामत रहे,

माला जप्ती रहुगी तेरे नाम की,

दया मुझे पे ये करना दयावान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

देदो अपनी पुजारन को वरदान माँ......

मेरे जीवन का मालिक है जो देवता,

उम्र मेरी भी उनको लगा देना माँ,

उनकी सांसो में सांसे घुलती रहे,

मुझको दिल से तू ये ही दुआ देना माँ,

तेरा होगा बड़ा ही ये एहसान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

मुझसे हो ना जुदा मेरा भगवान माँ,

के जब तक जियु मैं सुहागन जियु,

देदो अपनी पुजारन को वरदान माँ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।