ये प्रीत तुम्हारी श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है,

हम बुला बुला हारे तुम्हे लाज ना आती है॥

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है।

हम तो तुझे याद करे तुम हमको बिसरादो,

हम तुमको ना बिसराए तुम हमको ठुकरा दो,

क्यों तड़पाते हो हमे तुम बनाके साथी है,

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है॥

फिरत फिरत आंखे ये पलकें भी दुखने लगी,

नही नींद हमे आती ये रात भी ढलने लगी,

कैसे निर्मोही तुम ये रात बताती है,

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है॥

जब हम सो जाते है तुम दौड़े आते हो,

हम आँख दिखाते जब तुम हस के दिखाते हो,

कैसी ये प्रीत तेरी हमे समझ ना आती है,

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है॥

एक भक्त पुकारा था तुझे जाना से प्यारा था,

उसे लगन थी एक तेरी एक तेरा सहारा था,

नरसी था नाम उनका, थी भक्ति साँची है,

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है॥

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है,

हम बुला बुला हारे तुम्हे लाज ना आती है,

ये प्रीत तुम्हारी श्याम हमे नही पोसाती है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।