झुक झुक साई द्वारे झुक

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

झुक झुक झुक साई द्वारे झुक,

फिर गाडी ज़िन्दगी की सकेगी ना रुक,

झुक झुक झुक साई द्वारे झुक,

फिर गाडी ज़िन्दगी की सकेगी ना रुक,

साई चिंता हर लेंगे झोली तेरी भर देंगे,

साई चिंता हर लेंगे झोली तेरी भर देंगे,

आएंगे नज़दीक फिर ना तेरे, इस दुनिया के दुःख दुःख दुःख,

घर घर घर घर घर साई का चर्चा है,

सबसे सबसे सबसे द्वार ये ऊंचा है,

झुक झुक झुक झुक.........

चाहे आसमान पे है तारे बेशुमार,

साई के है उनसे भी ज़्यादा उपकार,

आजा साफ़ मन से तू पास जाके देख,

झूठ नही कहती मैं आज़मा के देख,

झुक झुक झुक झुक झुक झुक झुक झुक,

दुनिया में कितना ये द्वार मशहूर है,

जहाँ लोग जाते वहाँ कुछ तो ज़रूर है,

वहाँ पे ज़रूरतों का हर फूल खिलता,

नही अगर मांगना बिन मांगे मिलेगा,

तेरी हर भावना को वो भी आज़मायेगा,

फिर वो आवाज देके तुझको बुलायेगा,

अपनी तराज़ू पे वो भी तो है तोलता,

ताले वो नसीबो के यूंही नही खोलता,

जय जय हो जय जय हो जय जय हो।

झुक झुक झुक साई द्वारे झुक,

फिर गाडी ज़िन्दगी की सकेगी ना रुक,

झुक झुक झुक साई द्वारे झुक,

फिर गाडी ज़िन्दगी की सकेगी ना रुक,

साई चिंता हर लेंगे झोली तेरी भर देंगे,

साई चिंता हर लेंगे झोली तेरी भर देंगे,

आएंगे नज़दीक फिर ना तेरे, इस दुनिया के दुःख दुःख दुःख,

घर घर घर घर घर साई का चर्चा है,

सबसे सबसे सबसे द्वार ये ऊंचा है,

घर घर घर घर घर घर साई का चर्चा है,

सबसे सबसे सबसे द्वार ये ऊंचा है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।