साई धुन गुन गुनाते जाना है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन साईं भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साई धुन गुन गुनाते जाना है,

साई का दरस पाना है,

साई धुन गुन गुनाते जाना है,

साई का दरस पाना है,

साईमय होके जग भुलाना है,

साई का दरस पाना है,

साई धुन गुन गुनाते जाना है,

साई का दरस पाना है।

है पिता वो ही माता है बहन वो ही,

भ्राता, विद्या, धन, सखा सब कुछ साईनाथ है,

जो भजे उसे हर पल भक्ति से वो पाये बल,

साई बाबा निसदिन ही उसके साथ है,

सुखदायी ये ही इक ठिकाना है,

साई का दरस पाना है,

साईमय होके जग भुलाना है,

साई का दरस पाना है।

धुनि की अगन में हम भस्म कर दे अपने गम,

खुशिया ही बटोरे थाम साई के चरण,

शिरडी जो भी आता है आसरा वो पाता है,

भक्तो को हमेशा साई देता है शरण,

जाके वही अपना सर झुकाना है,

साई का दरस पाना है,

साई धुन गुन गुनाते जाना है,

साई का दरस पाना है,

साईमय होके जग भुलाना है,

साई का दरस पाना है,

हा साई का दरस पाना है,

हा साई का दरस पाना है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।