बालाजी जाऊं कहाँ

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हर पल यही कहती हू के दूर मत रहना,

करती हू भजन तेरा,

दिल में तू ही तू रहना।

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के,

अंजनी के लाला हनुमान प्यारे,

लाज मेरी रखना सीता राम के दुलारे,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के,

अंजनी के लाला हनुमान प्यारे,

लाज मेरी रखना सीता राम के दुलारे,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के।

मैंने तुझको पूजा, तेरा ध्यान किया,

तन मन धन और सब कुछ तुझ पर वार दिया,

मैंने तुझको पूजा, तेरा ध्यान किया,

तन मन धन और सब कुछ तुझ पर वार दिया,

झूठी दुनियादारी मैंने जान लिया,

सच्चा तेरा नाम तुझे पहचान लिया,

अंजनी के लाला हनुमान प्यारे,

लाज मेरी रखना सीता राम के दुलारे,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के।

छोड़ ना जाना,

छोड़ ना जाना,

छोड़ ना जाना हो,

आँख मिले अंधो को,

बाँझो को पुत्र मिले,

तेरे नाम के जाप से सबको राम मिले,

आँख मिले अंधो को,

बाँझो को पुत्र मिले,

तेरे नाम के जाप से सबको राम मिले,

मेहंदीपुर आके जो तेरा ध्यान धरे,

ध्यान धरे..

केसरीनंदन हनुमान कल्याण करे,

अंजनी के लाला हनुमान प्यारे,

लाज मेरी रखना सीता राम के दुलारे,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के,

अंजनी के लाला हनुमान प्यारे,

लाज मेरी रखना सीता राम के दुलारे,

बालाजी बालाजी जाऊं कहाँ,

दर छोड़ के तेरा दर छोड़ के........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।