सरयू किनारे रस्ता देखे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सरयू किनारे रस्ता देखे,

कब आओगे राम हमारे,

सरयू किनारे रस्ता देखे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

हो बांट निहारे, नैना थक हारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे।

चौदह बरस भी बीत चुके है,

पलकों में आँसू आके रुके है,

चौदह बरस भी बीत चुके है,

पलकों में आँसू आके रुके है,

अवध पुकारे राज दुलारे,

आजा कौशल्या के प्यारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे।

राज त्याग के भये बनवासी,

नगरी अयोध्या छायी उदासी,

राज त्याग के भये बनवासी,

नगरी अयोध्या छायी उदासी,

दूर उदासी कर बनवासी,

हर कोई बांट निहारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

सरयू किनारे रस्ता देखे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे।

घर-घर सबने दीप जलाये,

राहों में तेरी नैन बिछाये,

घर-घर सबने दीप जलाये,

राहों में तेरी नैन बिछाये,

कोमल रैना लागे बैना,

आशा का दीप जला जा रे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

सरयू किनारे रस्ता देखे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

हो बांट निहारे नैना थक हारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे,

कब आओगे राम हमारे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।