मन रे जीवन है दिन चार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मन रे जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार,

राम का सुमिरन कर ले बन्दे,

राम का सुमिरन कर ले बन्दे,

दुनिया में नहीं सार,

जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार।

कल परदेस में आया था तू,

लौट तुझे घर जाना है,

कब समझेगा बात ये मनवा,

झूठ को क्युँ सच माना है,

ओ कल परदेस में आया था तू,

लौट तुझे घर जाना है,

कब समझेगा बात ये मनवा,

झूठ को क्युँ सच माना है,

प्राण का पंछी खोल उड़ेगा,

प्राण का पंछी खोल उड़ेगा,

तन पिंजरे का द्वार,

जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार॥

जिसके पीछे भागे वो है साया,

हाथ न आएगा,

इतराएं करनी पे लेकिन,

अंत समय पछताएगा,

ओ जिसके पीछे भागे वो है साया,

हाथ न आएगा,

इतराएं करनी पे लेकिन,

अंत समय पछताएगा,

काहे सर पे लिए फिरे तू,

काहे सर पे लिए फिरे तू,

जनम जनम का भार,

जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार॥

दुनिया एक मुसाफिरखाना,

हर चेहरा लगता बेगाना,

जिसे बुलावा आ जाएगा,

छोड़ जगत उसको है जाना,

ओ दुनिया एक मुसाफिरखाना,

हर चेहरा लगता बेगाना,

जिसे बुलावा आ जाएगा,

छोड़ जगत उसको है जाना,

राम बिना नहीं कर पाएगा,

राम बिना नहीं कर पाएगा,

ये भवसागर पार,

जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार॥

राम का सुमिरन कर ले बन्दे,

राम का सुमिरन कर ले बन्दे,

दुनिया में नहीं सार,

जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार,

मन रे जीवन है दिन चार।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।