माँ का दर चूमकर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया॥

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया,

दर बदर घूम कर, मैया के द्वार पर,

मैंने झोली फैलाई, मजा आ गया,

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया॥

सिंह पर बैठ कर माँ भवानी चली,

दुष्ट दानव पे माँ की दुधारी चली,

रण में संहार कर, दुष्टों को मार कर,

मुण्डमाला बनाई, मजा आ गया,

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया॥

माँ की कृपा के बादल बरस जायेंगे,

सबके बिगड़े मुकद्दर संवर जायेंगे,

बात बन जायेगी, झोली भर जायेगी,

माँ से आशा लगाई, मजा आ गया,

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया॥

आसरा इस जहाँ में मिले ना मिले,

माँ के दर पे पदम को ठिकाना मिले,

आ गये द्वार माँ, कर दो उपकार माँ,

माँ की महिमा को गाई, मजा आ गया,

माँ का दर चूमकर, सारे गम भूलकर,

मैंने अर्जी लगाई, मजा आ गया...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।