हलवे की थाली भर भर लायी

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी,

माँ हलवे की थाली भर भर लायी,

मैं पहले तुझे भोग लगाऊं,

फिर मैं संगत में बटवाऊं,

मैं पहले तुझे भोग लगाऊं,

फिर मैं संगत में बटवाऊं,

पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,

लायी हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी।

ए माँ भर के देशी घी का हलवा,

मैंने आप बनाया,

मैंने आप बनाया,

हलवा मैंने आप बनाया,

किसमिस काजू मेवा डाल के चांदी के परत से सजाया,

चांदी के परत से सजाया,

चांदी के परत से सजाया,

माँ मेरी भोग लगाओ,

भोग अमृत ये बनाओ,

पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली मैं भर भर लायी।

माँ मीठा मीठा हलवा खा कर मीठा मीठा मीठा वर दो,

मीठा मीठा वर दो ,

अपने भक्तों की झोली माँ सुख संपत से भर दो,

सुख संपत से भर दो,

सुख संपत से भर दो,

माँ बड़ी दयालु हो तुम,

शरण में खड़े हुए हम,

ओ पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली मैं भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली मैं भर भर लायी।

हे जगजननी तुम तो सदा उपकार किया करती हो,

उपकार किया करती हो,

उपकार किया करती हो,

सरल सभी सपनो को साकार किया करती हो,

साकार किया करती हो,

साकार किया करती हो,

ये लखा दास तुम्हारा,

करू बस एक इशारा,

की पूरी मन की मुराद हो जाये माँ महा माई,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली मैं भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली मैं भर भर लायी,

मैं पहले तुझे भोग लगाऊं,

फिर मैं संगत में बटवाऊं,

मैं पहले तुझे भोग लगाऊं,

फिर मैं संगत में बटवाऊं,

पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,

लायी हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी,

हलवे की थाली भर भर लायी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।