धन्य वह घर ही है मंदिर जहाँ होती है रामायण

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

धन्य वह घर ही है मंदिर,

जहाँ होती है रामायण,

जहाँ होती है रामायण,

धन्य वह घर ही हैं मंदिर,

जहाँ होती है रामायण।।

यही है कर्म की कुंजी,

यही है धर्म की पूंजी,

यही है धर्म की पूंजी,

महापतितों से पतितों के,

महापतितों से पतितों के,

भी पाप धोती है रामायण,

धन्य वह घर ही हैं मंदिर,

जहाँ होती है रामायण।।

यही है संतो की महिमा,

यही है विश्व की गरिमा,

यही है विश्व की गरिमा,

मुक्ति का मार्ग दिखलाती,

मुक्ति का मार्ग दिखलाती,

भजन ज्योति है रामायण,

धन्य वह घर ही हैं मंदिर,

जहाँ होती है रामायण।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।