चुनरियाँ माँ की रेशमी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे,

हो मैया रानी आ गयी जयकारा लगाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में लोटा गंगा जल पानी,

हो मैया रानी आ गयी सब चरण धुलाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में थाली दिया और बाती,

हो मैया रानी आ गयी सब ज्योत जलाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में थाली चंदन रोली,

हो मैया रानी आ गई सब तिलक लगाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में थाली फूलो वाली,

हो मैया रानी आ गई सब माला पहनाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में थाली, थाली में चुनरी,

हो मैया रानी आ गई सब चुनरी ओढाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में ढोलक चिमटा और मजीरा,

हो मैया रानी आ गई सब भजन सुनाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

हाथ में थाली हलवा और पूरी,

हो मैया रानी आ गई सब भोग लगाओ रे,

चुनरियाँ माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।