पूजा करू शिव भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पूजा करू...

पूजा करू शिव भोले तुम्हारी,

बारह ज्योतिर्लिंग तुम्हारे,

सुखदायक जग पालनहारे,

भवतारक शिव अंतर्यामी,

तीन लोक के तुम हो स्वामी,

सोमनाथ तुम्हारी ज्योति,

जो कंकर को करती मोती,

उसका हर पल ध्यान लगाओ,

मनवांछित फल उससे पाओ,

मलिकार्जुन रूप निराला,

धन वैभव यश देने वाला,

नतमस्तक में उसके आगे,

किसी बला से डर ना लागे,

महाकाल है मूरत तेरी,

जिसने विपदा हर ली मेरी,

दिव्य अलौकिक उसकी माया,

कुंदन मेरी हो गयी काया,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला।

ओम्कार में छवि तुम्हारी,

हे मृत्युंजय गंगधारी,

जो जन उसका अर्चन करता,

सुख रत्नो से झोली भरता,

वैद्यनाथ भी धाम तुम्हारा,

ढूँढे जहाँ पर नाम तुम्हारा,

जिसने काँवर वहाँ चढ़ायी,

उसके प्रभु तुम हुए सहायी,

इन शंकर को टेक के माथा,

भय निकट कभी ना आता,

मनोकामना पूरण होती,

जागे किस्मत कभी ना सोती,

भज लिया जिसने नाम केदारा,

पा गयी उसकी नाव किनारा,

चन्द्रभाल हे भस्म रमैया,

रक्षा करना जगत रचैया,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला।

विश्वनाथ हे विश्व के दाता,

जगपालक शिव भाग्यविधाता,

तेरा सुमिरन है सुखदाई,

दीन हीन का सदा सहायी,

त्र्यंबकेश्वर भोले शंकर,

ले चल नैया केवट बन कर,

हे भक्तो के सखा सहारे,

युग युग से हम ऋणी तुम्हारे,

नागेश्वर है कला तुम्हारी,

शिव शम्भू भोला भंडारी,

विश्वनाथ हे विश्व के दाता,

जगपालक शिव भाग्यविधाता,

तेरा सुमिरन है सुखदाई,

दीन हीन का सदा सहायी,

त्र्यंबकेश्वर भोले शंकर,

ले चल नैया केवट बन कर,

हे भक्तो के सखा सहारे,

युग युग से हम ऋणी तुम्हारे,

नागेश्वर है कला तुम्हारी,

शिव शम्भू भोला भंडारी,

रोम रोम में बसा है मेरे,

करू मैं वंदन शाम सवेरे,

बड़ा रामेश्वर पावन मंदिर,

शिव तेरी ज्योति जिसके अंदर,

जब जब उसका चिंतन कीन्हा,

दुःख संताप मेरा हर लीना,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला,

बम बम भोला जय शिव भोला,

डमरू वाले शंकर भोला।

हे घुश्मेश्वर रूप निराले,

दया के सागर डमरू वाले,

पदपंकज की धूलि देना,

सदा ही सुध स्वामी लेना,

हर एक ज्योतिर्लिंग की भक्ति,

शक्तिहीन को देते शक्ति,

हे जगवंदन अपरम्पारा,

दरस तेरा निर्दोष न्यारा,

पूजा करू...

पूजा करू शिव भोले तुम्हारी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।