हर हर शिव शिव गाये जा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हर हर शिव शिव गाये जा,

भक्ति का दीप जलाये जा,

अंत समय आ जायेगा,

तब सिर धुनकर पछतायेगा तू,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

हर हर शिव शिव गाये जा,

भक्ति का दीप जलाये जा,

अंत समय आ जायेगा,

तब सिर धुनकर पछतायेगा तू,

जो शिव की शरण गहे उसे क्या कष्ट रहे,

जो शिव की शरण गहे उसे क्या कष्ट रहे।

जो शिव जी का अनुरागी है,

जो तन मन से वैरागी है,

जग में उसको दुर्लभ क्या है,

जो माया मोह का त्यागी है,

धरा के भव बंधन से मृत्यु और जीवन से,

मुक्त हो जाता है वही जग से,

हर हर शिव शिव तू गाये जा,

भक्ति का दीप जलाये जा,

अंत समय आ जायेगा,

तब सिर धुनकर पछतायेगा तू,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो।

भोले तो धरदानी है,

हर दान की एक कहानी है,

आँखों में स्नेह का सागर है,

होठो पे अमृत बानी है,

उन्हे जो अपनाता है उन्ही का हो जाता है,

उसी का ही जीवन तो सफल कहलाता है हो,

हर हर शिव शिव गाये जा,

भक्ति का दीप जलाये जा,

अंत समय आ जायेगा,

तब सिर धुनकर पछतायेगा तू,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

हर हर शिव शिव गाये जा,

भक्ति का दीप जलाये जा,

अंत समय आ जायेगा,

तब सिर धुनकर पछतायेगा तू,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो,

ओ शिव का जाप करो दूर संताप करो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।