आगे आगे चले बाराती

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो आगे आगे

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

सज धज कर बैठे नन्दी पर,

सज धज कर बैठे नन्दी पर,

दूल्हा बने हैं आज महेश्वर,

दूल्हा बने हैं आज महेश्वर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर।

माथे घनी जटा उलझाए,

भस्म भभूत बदन लिपटाये,

भूषण काल भुजंग गले में,

शिव की शोभा बढ़ती जाए,

माथे घनी जटा उलझाए,

भस्म भभूत बदन लिपटाये,

हो भूषण काल भुजंग गले में,

शिव की शोभा बढ़ती जाए,

अनुपम साज श्रृंगार सुहाए,

डम – डम डमरू नाद लुभाये,

बांधे कमर से बागाम्बर,

हो बांधे कमर से बागाम्बर,

हाथ में त्रिशूल भयंकर,

बांधे कमर से बागाम्बर,

हाथ में त्रिशूल भयंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर।

रमा शारदा मंगल गाएं,

चौक पुरती दसों दिशाएं,

ब्रह्मा विष्णु इन्द्र इन्द्राणी,

सुर मुनि जन मन मोद मनाएं,

रमा शारदा मंगल गाएं,

चौक पुरती दसों दिशाएं,

हो ब्रह्मा विष्णु इन्द्र इन्द्राणी,

सुर मुनि जन मन मोद मनाएं,

भूतनाथ के संगी साथी,

बे ढब बे ढंगे बाराती,

मस्ती में चले लहराकर,

हो मस्ती में चले लहराकर,

जपते मुख से हर हर,

हो आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

हो आगे आगे

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

हां सज धज कर बैठे नन्दी पर,

सज धज कर बैठे नन्दी पर,

दूल्हा बने हैं आज महेश्वर,

दूल्हा बने हैं आज महेश्वर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर,

आगे आगे चले बाराती,

पीछे - पीछे भोले शंकर।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।