मेरी आस तूँ है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी आस तूँ है माँ, विश्वास तूँ है माँ ll,

मेरी हर ख़ुशी का अब, आगाज़ तूँ है माँ,,,

दे दे माँ,,, आँचल की छईयाँ मुझे,

ले ले माँ,,, बाहों में अपनी मुझे ll

ग़म के थपेड़े ये, कैसे सहूँ मईया,

एक बार आके माँ, तूँ थाम ले बईयाँ ll

वर्ना मैं समझूंगा, नाराज़ तूँ है माँ ll,

मेरी हर ख़ुशी का अब, आगाज़ तूँ है माँ,,,

दे दे माँ,,, आँचल की छईयाँ मुझे,

ले ले माँ,,, बाहों में अपनी मुझे ll

कितनी करूँ कोशिश, कोई काम नहीं बनता,

दिल पे लगे ज़ख्मो का, माँ दर्द नहीं थमता ll

करदे कर्म मुझपे, मोहताज़ हूँ मैं माँ ll,

मेरी हर ख़ुशी का अब, आगाज़ तूँ है माँ,,,

दे दे माँ,,, आँचल की छईयाँ मुझे,

ले ले माँ,,, बाहों में अपनी मुझे ll

किस्मत मेरी मईया, क्यों मुझसे रूठ गई,

इसके सँवरने की, उम्मीद भी टूट गई ll

कल तक अकेला था, पर आज तूँ है माँ ll,

मेरी हर ख़ुशी का अब, आगाज़ तूँ है माँ,,,

दे दे माँ,,, आँचल की छईयाँ मुझे,

ले ले माँ,,, बाहों में अपनी मुझे ll

नईया भंवर में है, तुझको पुकारा माँ,

सूझे नहीं रास्ता, तुझको निहारा माँ ll

हरी हार नहीं सकता, गर साथ तूँ है माँ ll,

मेरी हर ख़ुशी का अब, आगाज़ तूँ है माँ,,,

दे दे माँ,,, आँचल की छईयाँ मुझे,

ले ले माँ,,, बाहों में अपनी मुझे ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।