करे मंगलवार का व्रत हम

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं

करे मंगलवार का व्रत हम, स्वीकार करो ना,

हम आये शरण तुम्हारी, उद्धार करो ना,

जय जय बाबोसा, जय जय बाबोसा॥

आये है बड़ी आशा से तुम्हारे दरबार मे,

हम भटक भटक के हारे झूठे संसार मे,

पलटा दो मेरी भी किस्मत...-2

चमत्कार करो ना,

हम आये शरण तुम्हारी, उद्धार करो ना,

जय जय बाबोसा, जय जय बाबोसा॥

अरदास लेकर आये, दुख दर्द के मारे,

ये जीवन तुझको अर्पण, ओ चुरू धाम वारे,

हम बालक है तुम्हारे....- 2

उपकार करो ना,

हम आये शरण तुम्हारी, उद्धार करो ना,

जय जय बाबोसा, जय जय बाबोसा॥

है कलयुग के अवतारी, हम पर करो महर,

तेरी नजर हो जिस पे बाबा, फिर ना कोई फिकर

दिलबर प्राची भक्तो के....-2

सिर पर हाथ धरो ना,

हम आये शरण तुम्हारी, उद्धार करो ना,

जय जय बाबोसा, जय जय बाबोसा,

करे मंगलवार का व्रत हम, स्वीकार करो ना,

हम आये शरण तुम्हारी, उद्धार करो ना,

जय जय बाबोसा, जय जय बाबोसा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।