सुनो मेरी माता प्यारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ,

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ,

सुनो मेरी माता प्यारी,

मतलब की है दुनिया सारी,

देख लिया मैंने जग सारा,

लगा बस तेरा दर ये प्यारा,

तेरे ही चरणों में रहना,

तेरे जैसा जग में और कही ना,

जय अम्बे माँ,

तेरे जैसा जग में और कही ना।

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ,

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ।

उंच नीच का भेद नहीं है,

तेरे लिये कोई वेर नहीं है,

जो भी श्रद्धा सुमन चढ़ाये,

मनवांछित फल वो ही पाये,

भक्तो को देदे खज़ाना,

तेरे जैसा जग में और कही ना।

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ,

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ।

जिसने भी अर्ज़ी लगायी,

मन की मुरादे है पायी,

सुनकर भक्तो की बोली,

भर देती उनकी झोली,

तू ही अम्बे, तू जगदम्बे,

तू ही है आद भवानी,

दुर्गा तू है, तू है काली,

है कष्ट मिटाने वाली,

जाने है सारा ज़माना,

तेरे जैसा जग में और कही ना।

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ,

जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ, जय अम्बे माँ।

विनती मेरी सुनो माँ,

दुखड़े दूर करो माँ,

नैया मेरी भंवर में,

इसको पार करो माँ,

तू ही अम्बे, तू जगदम्बे,

तू ही है आद भवानी,

दुर्गा तू है, तू है काली,

है कष्ट मिटाने वाली,

जाने है सारा ज़माना,

तेरे जैसा जग में और कही ना।

सुनो मेरी माता प्यारी,

मतलब की है दुनिया सारी,

देख लिया मैंने जग सारा,

लगा बस तेरा दर ये प्यारा,

तेरे ही चरणों में रहना,

तेरे जैसा जग में और कही ना,

जय अम्बे माँ,

तेरे जैसा जग में और कही ना........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।