क्यों भूल गए श्यामा मुझे पागल समझ कर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा, श्यामा, श्यामा, श्यामा,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर भूल गए,

पागल समझ कर भूल गए,

श्याम पागल समझ कर भूल गए,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर भूल गये।

मेरे मन में उठी उमंगें,

जप लूं नाम तुम्हारा,

तुम श्यामा, अब दर्शन दे दो,

तुम श्यामा, अब दर्शन दे दो,

होगा भला हमारा,

हम हैं बालक नादान,

क्यों कर हमको भूल गए,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गये।

तुम आओ या ना आओ,

मैं लूँगी नाम तुम्हारा,

जहाँ कहीं भी, तुम जाओगे,

पीछा करुँ तुम्हारा,

पीछा करुँ तुम्हारा,

मैं छोड़ नहीं सकती,

तुम बेशक मुझको छोड़ गये,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गये।

दुनियां में तुम भक्ति की माला,

जल्दी फेरो भगवन,

नहीं तो इस दुनिया में श्यामा,

नहीं तो इस दुनिया में श्यामा,

धर्म होएगा भंग,

क्यों तोड़ रहे श्यामा,

मेरा भक्ति भरा दिल तोड़ रहे,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गये।

मेरे मन में आस उठी तब,

आई पास तुम्हारे,

मातृदत्त तुम्हारा, तुम बिन,

मातृदत्त तुम्हारा, तुम बिन,

व्याकुल नन्द दुलारे,

मैं भूल नहीं सकती,

तुम बेशक हमको भूल चले,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गये।

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गए,

पागल समझ कर भूल गए,

श्याम पागल समझ कर भूल गए,

क्यों भूल गए श्यामा,

मुझे पागल समझ कर, भूल गये........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।