मेरा हमदम वो बनके बाबोसा

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा

( मेरे बाबोसा ने ही खुशी, दी उपहार में,

वो आ गये करीब, मेरी एक पुकार में। )

मेरा हमदम वो बनके बाबोसा, मेरे साथ चलता है,

अंधेरो में भी अब मुझको, पता मंजिल का मिलता है॥

मैं था मजबूर दुनिया मे, मुझे ठुकराया अपनो ने,

फरिश्ता बनके बाबोसा.... मेरे सपनों में आये थे,

ना तो घबरा की मैं हु ना, फिकर क्यो अब तू करता है,

अंधेरो में भी अब मुझको, पता मंजिल का मिलता है,

मेरा हमदम वो बनके बाबोसा, मेरे साथ चलता है॥

खुशी से भर गया दामन, नजर जब मुझपे है डाली,

सितारा है बुलन्दी पर... मेरी हर रोज दीवाली है,

बिन मांगे ही बाबा सब , मुरादे पूरी करता है,

अंधेरो में भी अब मुझको, पता मंजिल का मिलता है,

मेरा हमदम वो बनके बाबोसा, मेरे साथ चलता है॥

तुम्हे पाकर के अब बाबा, जरूरत धन ना दौलत की,

तेरे होते मुझे दिलबर ... तमन्ना है ना शोहरत की,

गुजारा देव का बाबा, तेरी रहमत से चलता है,

अंधेरो में भी अब मुझको, पता मंजिल का मिलता है,

मेरा हमदम वो बनके बाबोसा, मेरे साथ चलता है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।