चिंता हरण तू है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर,

भक्तों का रक्षक पापों का भक्षक,

भक्तों का रक्षक पापों का भक्षक,

करुणा का तू तो है अवतार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर।

श्रद्धा के भाव से तुझको जो खींचे,

उड़के तू उस ओर जाता,

सच्चे पुजारी सदाचारी के,

तू संकट है पल में मिटाता,

भक्ति के दो फूल करता जो अर्पण,

भक्ति के दो फूल करता जो अर्पण,

कर देता उस पे तू उपकार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर।

जिसको अभयदान तुझसे है मिलता,

उसको ना कोई भी मारे,

आंधी से वो ना डरेगी रे नइया,

जिसको तू खुद आप तारे

भक्ति तुम्हारी से भक्तों के सपने,

भक्ति तुम्हारी से भक्तों के सपने,

होते हैं घड़ियों में साकार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर।

मन से मनन जिसने तेरा किया है,

उसके तू सिद्ध कार करता,

भर देता धन से तू घर बार उसका,

किसी का ना मोहतार करता,

वो तेरे संग ना टिकता घड़ी भर,

वो तेरे संग ना टिकता घड़ी भर,

करता जरा जो अहंकार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर

भक्तों का रक्षक पापों का भक्षक,

करुणा का तू तो है अवतार शंकर,

चिंता हरण तू है ओंकार शंकर,

मंगल करण तू है ओंकार शंकर।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।