इक वारी आजा श्याम वे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे,

मैनु तेरे मिलन दा चाह,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे॥

सारी सारी रात मैनु नींद नहीं औंदी ए,

इक ते जुदाई, दूजा याद सतांदी ए,

रोग केहो जेहा दित्ता मैनु ला,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे॥

प्रेम दी जंजीर पाके तू ता गया नठ वे,

होवेगा दीदार किवें एह वी ज़रा दस् वे,

हाल दिल वाला दित्ता ए सुना,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे॥

जदों दा शामां तैनू दिल च वसाया ए,

दूसरा ना कोई मेरे दिल विच आया ए,

हुण खुश रख भावें तू रवा,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे॥

मैं ते तेरे कोलो कोई गल ना लुकोई ए,

होवेगा दीदार कदो ए भी तू ही बताई दे,

मैं ता तेरी होई तू भी मेरा हो,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे,

मैनु तेरे मिलन दा चाह,

इक वारी आजा श्याम वे,

अखां थक गईयां तक तक राह,

इक वारी आजा श्याम वे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।