दुनिया दी सुणदा

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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया दी सुणदा, मैं की जाणा,

जे मेरी सुण लये, मैं ता मणां,

जे मेरी सुण लये, मैं ता मणां,

दुनिया दी सुणदा, मैं की जाणा,

जे मेरी सुण लये, मैं ता मणां.......

( ਦੁਨੀਆਂ ਦੀ ਸੁਣਦਾ, ਮੈਂ ਕੀ ਜਾਣਾ,

ਜੇ ਮੇਰੀ ਸੁਣ ਲਏ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਮੰਨਾਂ xll -llll

*ਜੇ ਮੇਰੀ ਸੁਣ ਲਏ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਮੰਨਾਂ, xll -ll

ਦੁਨੀਆਂ ਦੀ ਸੁਣਦਾ, ਮੈਂ ਕੀ ਜਾਣਾ,

ਜੇ ਮੇਰੀ ਸੁਣ ਲਏ, ਮੈਂ ਤਾਂ ਮੰਨਾਂ xll -llll )...xxxx

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।