जा रे जा आकाश के पंछी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जा रे जा आकाश के पंछी, जल्दी उड़ के जाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

जा रे जा आकाश के पंछी।

दुःख के भस्मासुरो ने मेरी, कुटिया को है घेर लिया,

गमो के दानव टूट पड़े है, खुशियो ने मुँह फेर लिया,

प्रभु से कहियो....

प्रभु से कहियो कभी यहाँ भी,

प्रेम सुधा बरसाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

जा रे जा आकाश के पंछी।

गंगा का वर देके प्रभु ने, ऋषि की प्यास बुझाई रे

हम जैसे लाचारो की, क्यों उसे याद ना आयी रे

भूल चुके....

भूल चुके भगवान को जाके,

हमरी याद दिलाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

जा रे जा आकाश के पंछी।

देख तू जाके शंकर मेरे, किसकी धुन में खो गये,

महादयालु हो कर भी वो, क्यों निर्मोही हो गये,

ये तो बता दे....

ये तो बता दे क्यों भक्तो का,

दुश्मन हुआ ज़माना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

त्र्यंबकेश्वर शिव को मेरे, दिल का हाल सुनाना रे,

जा रे जा आकाश के पंछी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।