डमरू बाजे डिमक डिम डिम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डमरू बाजे डिमक डिम डिम,

डमरू बाजे डिमक डिम डिम,

जटा जुटन की मुकुट पर मौर फणधर का विराजै,

डमरू बाजे, डमरू बाजे,

डमरू बाजे डिमक डिम डिम,

डमरू बाजे डिमक डिम डिम,

जटा जुटन की मुकुट पर मौर फणधर का विराजै,

डमरू बाजे, डमरू बाजे, डमरू बाजे।

भस्म भूषित गौर तन पर रुचिर नीलाम्बर मनोहर,

रुचिर नीलाम्बर मनोहर

विषभ की खाशिन शंकर मुंडो की माला सजाकर,

मुंडो की माला सजाकर

चले जब सब गण पुकारे नमो हर हर नमो हर हर,

नमो हर हर नमो हर हर

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

परम सूंदर रूप अद्भुत रीतिकोटिक कामलाजै,

डमरू बाजे डमरू बाजे.......

चुरपानी त्र्यंभ शिवजी चले गौरा को व्याहने,

यु चले गौरा को व्याहने

नाचते है भूत गण सब देव किन्नर लगे गाने,

देव किन्नर लगे गाने

श्रीपति इन्द्रधि सुरनर लगे दर्शन लाभ पाने,

लगे दर्शन लाभ पाने

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

निरखि तू नर रूप शिव का नाचती अप्सरा साजे,

डमरू बाजे डमरू बाजे.......

जगत के कल्याण कर्ता सकल दुःख संताप हर्ता,

सकल दुःख संताप हर्ता

युगल श्री शिव शिवा के श्री चरण का जो ध्यान धर्ता,

चरण का जो ध्यान धर्ता

वो सदा सर्वदा शिव की कृपा से आनंद कर्ता,

कृपा से आनंद कर्ता

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

सदा शिवगौरीश शंकर ह्रदय में सबके विराजै,

डमरू बाजे डमरू बाजे,

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

सदा शिवगौरीश शंकर ह्रदय में सबके विराजै,

डमरू बाजे डमरू बाजे,

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

डमरू बाजे डिमक डिम डिम

जटा जुटन की मुकुट पर मौर फणधर का विराजै,

डमरू बाजे डमरू बाजे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।