माँ अम्बे तू भर दे मेरी झोली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ अम्बे तू भर दे मेरी झोली,

मैं आई तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ वैष्णों रानी तेरे द्वार पे,

ना जाऊं यहाँ से मैं खाली,

मैं आई तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, वैष्णों रानी तेरे द्वार पे।

तेरी कृपा माँ चलती है ये सृष्टि,

ज़्यादा ना मांगू बस एक ही विनती.....-2

दर्श तू देदे मुझको मेरी शेरावालिये,

आई तेरे द्वार पे मैं आई तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, वैष्णों रानी तेरे द्वार पे।

कब से ये आँखें तरसी तेरे दीदार को,

टूक टूक निहारूं पाने तेरे इस प्यार को......-2

लौटेगी ना ऐसे माँ तेरी ये सवाली तेरे द्वार से,

द्वार पे माँ, अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, वैष्णों रानी तेरे द्वार पे।

माँ अम्बे तू भर दे मेरी झोली,

मैं आई तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ वैष्णों रानी तेरे द्वार पे,

ना जाऊं यहाँ से मैं खाली,

मैं आई तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, अम्बे रानी तेरे द्वार पे,

द्वार पे माँ, वैष्णों रानी तेरे द्वार पे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।